महासमुंद। शहर में बढ़ती आबादी और बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए शासन-प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क चौड़ीकरण का कार्य करा रहा है। लेकिन यदि यही विकास कार्य आम नागरिकों के लिए खतरा बन जाए, तो उसकी उपयोगिता पर सवाल उठना लाज़िमी है। महासमुंद जिले में बीटीआई रोड से कलेक्टर कॉलोनी तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य में कुछ ऐसा ही दृश्य सामने आ रहा है, जहां लापरवाही और अव्यवस्था ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी
नियमानुसार सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम अनिवार्य होते हैं—जैसे चेतावनी सूचना फलक, खुदे गड्ढों के चारों ओर लाल रेडियम संकेतक, और सफेद बोरे में भरी रेत रखकर खतरे का संकेत देना। विशेष रूप से रात के समय ये इंतजाम वाहन चालकों के लिए बेहद जरूरी होते हैं।
लेकिन मौके पर इन नियमों का पालन होते नहीं दिख रहा। सड़क पर बिना किसी चेतावनी के गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं। निर्माण सामग्री बेतरतीब ढंग से फैली हुई है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
10 से 12 बार फटी पाइपलाइन, पेयजल संकट
निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी मशीन से खुदाई करते समय
निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी मशीन से खुदाई करते समय पानी की पाइपलाइन भी बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है। अब तक 10 से 12 बार पाइप फटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके चलते कई मोहल्लों में दो से तीन दिन तक पेयजल आपूर्ति बाधित रही, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
चौबीसों घंटे उड़ती धूल से स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। सांस और एलर्जी संबंधी शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
अधिकारियों के बयान
इस मामले में नगरपालिका के जल प्रभारी का कहना है कि पाइप फटने की उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
वहीं महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं हादसे
गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली, नोएडा और कानपुर में सड़क निर्माण के दौरान खुदे गड्ढों में गिरने से जानलेवा हादसे सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, तो यह ठेकेदार और कार्य एजेंसी की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा या समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएंगे? फिलहाल नगरवासी डर और असुविधा के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं। सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



