महासमुंद जिले में धान खरीदी केंद्रों के ऑनलाइन सत्यापन में गंभीर लापरवाही का मामला गर्माया हुआ है, जिसके बाद कलेक्टर ने नोडल अधिकारी को नोटिस थमाया है। बड़ी बात यह है कि नोटिस के दो दिन बाद भी जवाब नहीं मिला है, जिससे अब अधिकारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक में आने वाले तीन खरीदी केंद्रों—गढ़फुलझर, बड़ेडाबा और हाड़ापथरा में ऑनलाइन भौतिक सत्यापन का काम अटका पड़ा है। इन केंद्रों के प्रभारी नोडल अधिकारी उमेश वर्मा को कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने 19 जनवरी को ही कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था। वर्मा को 24 घंटे के भीतर अपनी सफाई देनी थी, मगर सुत्रों का कहना है कि दो दिन बीत जाने पर भी उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। छत्तीसगढ़ में इस वक्त समर्थन मुल्य पर धान की खरीदी जोरों पर चल रही है और जिले के 182 केंद्रों पर प्रशासन पैनी नजर रखे हुए है। कलेक्टर खुद लगातार केंद्रों का निरिक्षण कर रहे हैं ताकि व्यवस्था पारदर्शी रहे, लेकिन अधिकारियों की यह सुस्ती पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमेश वर्मा ने अपने प्रभार वाले केंद्रों में डेटा का मिलान और ऑनलाइन सत्यापन करने में भारी ढिलाई बरती है। कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए नोटिस में कड़ी हिदायत दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो ‘छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण निवारण अधिनियम, 1979’ के तहत उन पर सख्त कार्यवाही होगी। आज 21 जनवरी तक कोई जवाब न आने की वजह से अधिकारी के निलंबन की अटकलें तेज हो गई हैं। हालाकि, अभी तक जिला प्रशासन ने इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
ऑनलाइन भौतिक सत्यापन का काम इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इसके बिना खरीदी में होने वाली किसी भी गड़बड़ी को पकड़ना मुमकिन नहीं है। इन तीनों केंद्रों पर धान की अच्छी आवक हुई है, जिसमें गढ़फुलझर में 48,716 क्विंटल, बड़ेडाबा में 39,091 क्विंटल और हाड़ापथरा में 14,460 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है। वास्तविक स्टॉक के सही मिलान के लिए ऑनलाइन सत्यापन ही एकमात्र रास्ता है। महासमुंद जिले का पुराना रिकार्ड देखें तो देरी की वजह से पहले भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं, इसी को देखते हुए कलेक्टर लंगेह ने साफ कर दिया है कि काम में कोताही करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।



