रायपुर: छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड द्वारा दो अलग-अलग धर्मों के पक्षों के बीच होने वाले निकाह को लेकर तैयार की गई नई गाइडलाइंस पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस पूरे मामले पर प्रमुख धार्मिक गुरु मौलाना सैय्यद अशरफ जिलानी का एक वीडियो बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने वक्फ बोर्ड के इस कदम पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस बयान के सामने आने के बाद से इस पूरे विषय पर कानूनी सीमाओं को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
धार्मिक गुरुओं और जानकारों के एक पक्ष का कहना है कि वक्फ अधिनियम के मुताबिक वक्फ बोर्ड एक प्रशासनिक संस्था है, जिसका मुख्य काम मुख्य रूप से वक्फ संपत्तियों जैसे मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान और उनसे जुड़ी जमीनों की देखरेख और उनका प्रबंधन संभालना है। इस पक्ष का तर्क है कि बोर्ड को पर्सनल लॉ या निकाह जैसी व्यक्तिगत व्यवस्थाओं में अपनी मर्जी से नए नियम तय करने का वैधानिक अधिकार नहीं है क्योंकि निकाह कराने की प्रक्रिया हमेशा से पारंपरिक और पर्सनल लॉ के दायरे में आती है।
इस विषय पर यह बात भी सामने आ रही है कि वक्फ बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी होने वाले विभिन्न आदेशों के कारण अक्सर ऐसी स्थितियां बनती हैं। पूर्व में वक्फ बोर्ड द्वारा दरगाहों और उर्स के कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर और डीजे को लेकर एक आदेश जारी किया गया था, जिस पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक लगा दी थी। उस पुराने मामले का हवाला देते हुए अब इस नए फैसले को भी कानूनी नजरिए से देखा जा रहा है।
दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज का इस पूरे मामले पर अपना तर्क है। उनका कहना है कि बोर्ड का यह नया कदम केवल मस्जिदों में काजियों द्वारा कराए जाने वाले निकाह को व्यवस्थित करने के लिए उठाया गया है। उनके मुताबिक इसके लिए एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी जो दोनों पक्षों के कागजातों की जांच करेगी ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई जोड़ा देश के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज करता है, तो उस पर बोर्ड का कोई नियम लागू नहीं होगा, यह व्यवस्था केवल धार्मिक निकाह के दायरे तक सीमित है।
वक्फ बोर्ड के इन तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए मौलाना सैय्यद अशरफ जिलानी ने वीडियो में वक्फ अध्यक्ष पर सीधा निशाना साधा है। मौलाना जिलानी ने अपने बयान में कहा है कि वक्फ बोर्ड को धार्मिक मामलों और निकाह जैसी व्यवस्था में दखल देने का कोई हक नहीं है। कानून के मुताबिक वक्फ बोर्ड का काम सिर्फ वक्फ संपत्तियों की देखरेख करना है, और बोर्ड के इस तरह के बयानों से न तो निकाह रुकने वाला है और न ही उलेमाओं का काम रुकेगा। मौलाना ने आरोप लगाया कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज अपना असली काम छोड़कर खुद को ‘सरकारी काजी’ के रूप में स्थापित करना चाहते हैं और काजी की कुर्सी पर बैठना चाहते हैं। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि कभी आप मदरसों के मामले में आ जाते हैं, कभी मस्जिदों पर तो कभी निकाह पर, जबकि यह काम उलेमाओं का है और उन्हें ही करने दिया जाना चाहिए।
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छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का निकाह पर नया आदेश जानिए क्या कहता है देश का कानून?
मौलाना जिलानी ने वक्फ बोर्ड को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि आप किसी विशेष पक्ष या किसी राजनीतिक विंग को खुश करने के लिए ये सब फैसले लेना बंद करें, नहीं तो समाज इसका खुलकर विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि अगर बोर्ड को समाज की इतनी ही फिक्र है, तो वे उन बेटियों की सुध लें जो समाज से बाहर जाकर शादियां कर रही हैं। मौलाना जिलानी ने कहा कि वक्फ बोर्ड की मनमानी पर अदालतों का पूरा नियंत्रण है, इसलिए वे बोर्ड के इस नए नियम के खिलाफ सीधे कोर्ट जाएंगे। उन्होंने याद दिलाया कि जब पहले वक्फ बोर्ड ने डीजे बैन करने का आदेश जारी किया था, तब भी हाई कोर्ट ने उस पर तुरंत रोक लगा दी थी, और इस निकाह वाले फैसले को भी कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के इस नए विवाद पर लगातार नजर बनी हुई है।



