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मजदूरों की सुरक्षा में चूक, जिंदल-MSP-NR इस्पात के खिलाफ कोर्ट बड़ा फैसला

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रायगढ़, 13 फरवरी 2026। औद्योगिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जिले की पांच औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग, रायगढ़ संभाग द्वारा विभिन्न कारखानों में हुई दुर्घटनाओं के बाद किए गए निरीक्षण में कई अहम खामियां और नियमों के उल्लंघन सामने आए थे। इन अनियमितताओं के आधार पर कारखाना अधिनियम, 1948 तथा संबंधित नियमों के अंतर्गत कुल पांच आपराधिक प्रकरण श्रम न्यायालय, रायगढ़ में दायर किए गए। मामलों की सुनवाई के पश्चात जनवरी 2026 में न्यायालय ने संबंधित कारखानों के अधिभोगियों एवं प्रबंधकों पर लाखों रुपये का अर्थदंड लगाया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक, औद्योगिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में श्रम न्यायालय, रायगढ़ ने संबंधित इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई की है।

मेसर्स जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, यूनिट-4, एमएलएसएम, खरसिया रोड, रायगढ़ में कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 7ए(2)(डी) के उल्लंघन पर अधिभोगी को 70 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। वहीं मेसर्स एमएसपी स्टील एंड पावर लिमिटेड, ग्राम जामगांव, रायगढ़ के अधिभोगी एवं कारखाना प्रबंधक के विरुद्ध धारा 7ए(2)(ए) तथा धारा 21(1)(4) के उल्लंघन पर प्रत्येक पर 1 लाख 60 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इसी कंपनी से जुड़े एक अन्य प्रकरण में धारा 41 एवं संबंधित नियम 73(घ) और 73(1) के उल्लंघन के चलते जिम्मेदार अधिकारियों पर क्रमशः 1 लाख 40 हजार रुपये एवं 1 लाख 40 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया।

जानकारी के अनुसार, औद्योगिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामलों में श्रम न्यायालय, रायगढ़ ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित इकाइयों पर अर्थदंड लगाया है।

कंपनी के एक अतिरिक्त मामले में कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 7ए(2)(डी) एवं 7ए(2)(ए) के उल्लंघन पर 1 लाख 60 हजार रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया गया। इसके अतिरिक्त, मेसर्स आर.एस. इस्पात रायगढ़ प्राइवेट लिमिटेड, ओपी जिंदल इंडस्ट्रियल पार्क, पूंजीपथरा रायगढ़ में धारा 7ए(2)(ए) एवं 21(1)(4) के उल्लंघन के मामले में संबंधित अधिभोगी एवं प्रबंधक को 1 लाख 40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध भविष्य में भी वैधानिक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।