बीजापुर। छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र बीजापुर के दक्षिणी हिस्से में सुरक्षा बलों और सशस्त्र माओवादियों के बीच मुठभेड़ की खबर है। जिला पुलिस बल को इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सटीक सूचना मिली थी, जिसके आधार पर 28 जनवरी 2026 की तड़के एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इस अभियान में District Reserve Guard (DRG) की विशेष टीम को मोर्चे पर तैनात किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, जब डीआरजी की टीम सुबह करीब 7 बजे घने जंगलों की ओर बढ़ रही थी, तभी माओवादियों ने जवानों पर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। फिलहाल इलाके में दोनों ओर से रुक-रुक कर फायरिंग जारी है। दुर्गम पहाड़ी इलाका और घना जंगल होने के कारण जवान पूरी रणनीति और सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। Security Forces ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर ली है ताकि नक्सलियों के भागने के रास्ते बंद किए जा सकें।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुठभेड़ में अभी तक सभी जवान सुरक्षित हैं और वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे Operation वाले क्षेत्र से दूर रहें और किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें। अभियान समाप्त होने के बाद ही नुकसान या बरामदगी का पूरा विवरण साझा किया जाएगा।
बस्तर आईजी पी सुंदरराज के अनुसार, माओवादी संगठन की केंद्रीय समिति का दायरा लगातार सिमट रहा है। एक समय (2003-2010) इस समिति में 40-45 सदस्य हुआ करते थे, जो जनवरी 2025 तक घटकर 21 रह गए। पिछले एक साल में 12 सदस्य मारे जा चुके हैं और 5 ने आत्मसमर्पण कर दिया है।
वर्तमान में गणपति, थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी, मिसिर बेसरा और मल्लाराजी रेड्डी जैसे बड़े Leaders ही शेष बचे हैं, जिनमें देवजी को कार्यकारी महासचिव माना जा रहा है। इनमें से चार शीर्ष नेताओं पर 1-1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है, जिनकी तलाश में पुलिस सरगर्मी से जुटी है।


