नई दिल्ली: न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को और भी बेहतर बनाने और अदालतों में लटके हुए मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आज कई बड़ी-प्रशासनिक घोषणाएं की हैं। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य तकनीक के जरिए अदालतों की परिचालन क्षमता को बढ़ाना और पुराने पड़ चुके प्रशासनिक तरीकों को आधुनिक बनाना-है।
डिजिटल साझेदारी की शुरुआत- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विभिन्न उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर एक Digital Partnership शुरू करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायालयों तक के सभी आदेश डिजिटल रूप से अपडेट किए जाएंगे। ये आदेश सभी अदालतों में आसानी से देखे जा सकेंगे, जिससे उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ही स्तरों पर लंबित मामलों का एक बड़ा और सटीक डेटाबेस-तैयार हो सकेगा।
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए जस्टिस सूर्यकांत ने एक एकीकृत ऑनलाइन भुगतान प्रणाली शुरू करने की भी घोषणा की। इसके साथ ही, न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए मुख्य न्यायाधीश ने एक खास मोबाइल एप्लीकेशन Park Authorization Record Keeper (पार्क ऑथराइजेशन रिकॉर्ड कीपर) लॉन्च किया।
यह नया ऐप वाहनों की अनुमति देने और सुरक्षा नियमों का पालन कराने की पूरी प्रक्रिया को स्वचालित (ऑटोमेटेड) कर देगा। अब आवेदकों को दफ्तरों के चक्कर-नहीं काटने पड़ेंगे; वे सीधे ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं और ऐप के जरिए ही अपने आवेदन की स्थिति (स्टेटस) की जानकारी ले सकेंगे। मुख्य न्यायाधीश का यह कदम न्यायपालिका को डिजिटल युग में एक कदम और आगे ले जाने वाला साबित-होगा।



