नई दिल्ली। दिल्ली के कर्तव्य पथ पर इस बार छत्तीसगढ़ की झांकी ने ऐसी चमक बिखेरी कि हर कोई देखता रह गया। 77वें गणतंत्र दिवस के इस खास मौके पर छत्तीसगढ़ ने अपनी ‘शौर्यगाथा’ को पूरी दुनिया के सामने रखा। इस बार की थीम “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” पर आधारित थी, जिसमें हमारे जनजातीय वीरों के बलिदान को बड़े ही शानदार ढंग से दिखाया गया।
इस झांकी के जरिए नवा रायपुर में बने देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय (Digital Museum) की एक झलक दिखाई गई। यह वही म्यूजियम है जिसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के 25वें स्थापना दिवस पर किया था। इसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के 14 बड़े आदिवासी आंदोलनों को नई डिजिटल तकनीक से संजोया गया है।
झांकी में सबसे आगे 1910 के महान ‘भूमकाल विद्रोह’ के नायक वीर गुंडाधुर को देखा गया। धुर्वा समाज के इस महान सपूत ने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। झांकी में उस समय के विद्रोह के खास निशान ‘आम की टहनियों’ और ‘लाल मिर्च’ को भी दिखाया गया। अंग्रेज उस वक्त इतने घबरा गए थे कि उन्हें नागपुर से फौज बुलानी पड़ी थी, फिर भी वे गुंडाधुर को पकड़ने में नाकाम रहे।
झांकी के पिछले हिस्से में छत्तीसगढ़ के गौरव, शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार दिखाया गया। हाथ में तलवार और आंखों में चमक लिए उनका यह रूप 1857 की क्रांति की याद दिलाता है। उन्होंने अकाल के वक्त गरीबों की मदद के लिए अंग्रेजों से जो लोहा लिया, उसे आज भी हर छत्तीसगढ़ी बड़े गर्व से याद करता है।
परेड के दौरान इस झांकी ने यह साफ कर दिया कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और यहां के वीरों का इतिहास कितना गौरवशाली है।



