रायपुर: छत्तीसगढ़ में अब मोहर्रम के जुलूस और उर्स के आयोजनों के दौरान डीजे, धुमाल या आतिशबाजी का शोर सुनाई नहीं देगा। राज्य वक्फ बोर्ड ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए पूरे प्रदेश में ऐसी तमाम गैर-परंपरागत और हुड़दंग वाली गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि धार्मिक आयोजनों की गरिमा और पवित्रता से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
हुड़दंग करने वालों पर कसेगा शिकंजा
वक्फ बोर्ड द्वारा प्रदेश की सभी ताजिया कमेटियों, दरगाह प्रबंधन और जिम्मेदार पदाधिकारियों के लिए जारी किए गए इस कड़े दिशा-निर्देश में साफ कहा गया है कि मोहर्रम और उर्स जैसे पवित्र अवसर सिर्फ उपासना, धैर्य और सादगी के लिए हैं। इसलिए जुलूस या कार्यक्रमों के नाम पर नाच-गाना, बैंड-बाजा, डीजे या किसी भी तरह की आतिशबाजी की अनुमति कतई नहीं दी जा सकती। सभी कमेटियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे आयोजनों के दौरान हर हाल में धार्मिक अनुशासन और मर्यादा का पूरा ख्याल रखें।

कमेटी भंग करने और भारी जुर्माने की चेतावनी
इस नए नियम को हल्के में लेने वाली कमेटियों पर बोर्ड सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करने की तैयारी में है। आदेश के मुताबिक, अगर किसी भी जुलूस या उर्स में डीजे या हुड़दंग पाया गया, तो उस क्षेत्र की जिम्मेदार प्रबंधन कमेटी को सीधे भंग कर दिया जाएगा। इसके साथ ही नियमों की अनदेखी करने पर दोषी पदाधिकारियों और कमेटी पर 50,000 रुपये का भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कमेटी की ही होगी। बोर्ड ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे कर्बला के शहीदों के बलिदानों को याद करते हुए इस महीने को पूरी सादगी और अच्छे आचरण के साथ मनाएं।
मस्जिदों में लाउडस्पीकर से दी जाएगी जानकारी
इस आदेश को जमीनी स्तर पर मुस्तैदी से लागू करने के लिए बोर्ड ने मस्जिदों के इमामों को एक अहम जिम्मेदारी सौंपी है। निर्देश के मुताबिक, मोहर्रम के आगमन से पहले आने वाली आगामी जुमे की नमाज में इस पूरे सरकारी आदेश को लाउडस्पीकर के जरिए आम जनता को पढ़कर सुनाना होगा, ताकि हर कोई इन दिशा-निर्देशों से अच्छी तरह वाकिफ हो जाए। इसके साथ ही, इस आदेश की एक प्रति को हर मस्जिद के नोटिस बोर्ड पर भी अनिवार्य रूप से चस्पा करना होगा ताकि समाज का हर वर्ग इसके प्रति जागरूक रहे।



