रायगढ़। गारे पेल्मा (Gare Pelma) कोल ब्लॉक (SECL-ADANI) के लिए 19 मई को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से ठीक एक दिन पहले, रायगढ़ में कॉरपोरेट अधिग्रहण के तरीके पर एक बहुत बड़ा कानूनी और जमीनी सवाल खड़ा हो गया है। आज रायगढ़ कलेक्ट्रेट में जो हुआ, उससे यह साफ दिख रहा है कि साम-दाम-दंड-भेद और किस तरह से जनसुनवाई को प्रभावित करने के लिए सारी सीमाएं लांघ दी गई हैं। आंखों के सामने सारे सबूत होते हुए भी छत्तीसगढ़ सरकार और रायगढ़ जिला प्रशासन ने अपने मौन समर्थन के साथ आदिवासियों को लूटने की खुली छूट दे दी है। अब तो कल होने वाली जनसुनवाई की वैधानिकता (Legality) पर ही बहुत बड़ा सवालिया निशान है।
तमनार ब्लॉक के लालपुर गांव के ग्रामीणों ने आज रायगढ़ कलेक्ट्रेट पहुंचकर न केवल कॉरपोरेट द्वारा बांटे गए ‘प्रलोभन’ के सामानों को वापस किया, बल्कि कलेक्टर जनदर्शन में एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर 19 मई की जनसुनवाई पर स्पष्ट आपत्ति दर्ज करा दी है। ग्रामीणों का यह कदम उन दावों की हवा निकालता है, जिनमें कहा जा रहा था कि ग्रामीण ‘आपसी सहमति’ से प्रोजेक्ट के पक्ष में हैं।
1. जनसुनवाई को प्रभावित करने के लिए ‘सामान’ का वितरण
किसी भी पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों को किसी भी प्रकार का प्रलोभन देना जांच का विषय है। रायगढ़ जिला कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों के द्वारा दिखाए गए प्रलोभन की वस्तुओं का वीडियो एक साक्ष्य के रूप है। जिसमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि ‘Adani Foundation’ की ब्रांडिंग वाले क्रिकेट किट, टी-शर्ट, छाते और महिला समूहों (SHG) के लिए साड़ियां, दरी और स्टील की पेटियां (संदूक) ग्रामीणों को बांटी गई थीं। इसके पहले भी सोशल मीडिया में लोगों के द्वारा बताया गया था कि किस तरह टेबल, कुर्सी, पंखा कूलर जैसे घरेलू सामान लोगों को बांटे जा रहे हैं। जो जनसुनवाई को प्रभावित करने का सीधा-सीधा अपराध है।
रायगढ़ का आदिवासी बिकाऊ नहीं
कलेक्ट्रेट पहुंचे युवाओं और ग्रामीणों ने ऑन-कैमरा यह स्पष्ट किया है कि “यह सामान हमारी जमीन हड़पने और जनसुनवाई में हमें गुमराह करने की नीयत से दिया गया था।” ग्रामीणों द्वारा इस सामान को सरेआम कलेक्ट्रेट गेट पर लौटाना, कॉरपोरेट के उस ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ की पोल खोलता है जो अधिग्रहण से पहले किया जाता है। इस बार तमनार के आदिवासियों ने बता दिया है कि रायगढ़ का आदिवासी बिकाऊ नहीं है।

2. ऑन-रिकॉर्ड विधिक आपत्ति: जमीन का सही दाम और ‘नौकरी’ की मांग
सड़क पर विरोध के साथ-साथ लालपुर के ग्रामीणों ने एक बेहद मजबूत कानूनी कदम उठाया है। 18 मई 2026 को कलेक्टर जनदर्शन (सुरक्षा क्रमांक – 493, टोकन क्रमांक – 2040326009556) के माध्यम से ग्राम पंचायत के सरपंच की सील और 70 से अधिक ग्रामीणों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन सौंपा गया है।

इस ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है
समान मुआवजा: जब तक सभी प्रभावित गांवों के मुआवजे का समान मूल्य स्पष्ट नहीं किया जाता, तब तक जनसुनवाई मान्य नहीं होगी।
पुनर्वास और पक्की नौकरी: ज्ञापन की सबसे अहम शर्त है— “पुनर्वास के तहत 2 एकड़ जमीन के बदले 1 स्थायी सरकारी नौकरी।” ग्रामीण यह समझ चुके हैं कि सिर्फ नकद मुआवजे से उनके भविष्य का निर्वाह नहीं हो सकता।
जबरन जनसुनवाई पर चेतावनी: ग्रामीणों ने प्रशासन को लिखित में चेताया है कि यदि उनकी मांगों पर स्पष्ट समझौते के बिना 19 मई को ‘जबरन’ जनसुनवाई की जाती है, तो समस्त ग्रामवासी इसका लोकतांत्रिक विरोध करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।




